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रिटायरमेंट प्लानिंग

रिटायरमेंट प्लानिंग एक ऐसी प्रोसेस है, जिसकी मदद से आप अपने रिटायरमेंट के वर्षों के दौरान अपनी फाइनेंशियल आवश्यकताओं के लिए पैसों की व्यवस्था करते हैं. इसमें रिटायरमेंट के लिए बचत करना, आपके इन्वेस्टमेंट को मैनेज करना और आपके एसेट और इनकम की सुरक्षा शामिल है.

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भविष्य में आर्थिक रूप से सुरक्षित रहने के लिए आज से ही बचत करना शुरू करें! रिटायरमेंट प्लानिंग आपको रिटायरमेंट के बाद के जीवन का आनंद लेने में सक्षम बनाती है.

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हम अपने कस्टमर की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखते हैं और उन्हें अनावश्यक मैसेज नहीं भेजते हैं.

मैं एच डी एफ सी लाइफ और इसके प्रतिनिधियों को कॉल, ईमेल, SMS या व्हॉट्सऐप के माध्यम से मुझसे संपर्क करने के लिए अधिकृत करता/करती हूं. यह सहमति DNC/NDNC के तहत मेरे रजिस्ट्रेशन को ओवरराइड करती है (इसका मतलब है कि अगर आप किसी डू नॉट डिस्टर्ब लिस्ट में रजिस्टर्ड हैं, तो भी हम आपसे संपर्क कर सकेंगे).

Retirement Planning
Francis Rodrigues फ्रांसिस रॉड्रिग्स

फ्रांसिस रॉड्रिग्स के पास बीमा क्षेत्र में एक दशक का लंबा अनुभव है, और वे एच डी एफ सी लाइफ में SVP, ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की भूमिका में ऑनलाइन सेल्स चैनल के साथ-साथ डिजिटल और परफॉर्मेंस मार्केटिंग का प्रबंधन करते हैं. 2 दशकों के करियर में उन्हें शुरुआत से सेल्स चैनल और फंक्शनल टीम स्थापित करने का अच्छा खासा अनुभव रहा है.

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Author Profile लेखक:
Vishal Subharwal विशाल सुभरवाल

विशाल सुभरवाल एच डी एफ सी लाइफ में स्ट्रेटजी, मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, डिजिटल बिज़नेस और स्थिरता वाले पहलों का नेतृत्व करते हैं. वे पूरे संगठन के लिए स्ट्रेटजी बनाने और इसका सफल कार्यान्वन सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

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रिटायरमेंट प्लानिंग क्या है?

What Is Retirement Planning?

रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब है रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित फाइनेंशियल भविष्य की योजना बनाना. भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग का अर्थ ऐसे रिटायरमेंट प्लान खरीदने से है, जिसमें एक बड़ा कॉर्पस बनाने के लिए नियमित रूप से एक निश्चित राशि इन्वेस्ट करने की सुविधा हो, जिससे आपको रिटायरमेंट के बाद स्थायी और निश्चित राशि मिलती है. मूल सिद्धांत यह कहता है कि रिटायरमेंट प्लानिंग जितनी जल्दी हो सके, शुरू कर देना चाहिए; आप जितनी जल्दी इसकी शुरुआत करेंगे, आपके लिए उतना अधिक फायदेमंद होगा.

ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आप अपनी 20s या 30s की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करते हैं, तो आपके पास रिटायरमेंट प्लान की मदद से एक ऐसा महत्वपूर्ण फंड बनाने और बचाने के लिए पर्याप्त समय होता है, जिससे आपको रिटायरमेंट के बाद आरामदायक जीवन जीने में मदद मिलेगी.

यह पक्का करने के लिए कि आपको स्थायी तौर पर आय मिलती रहे, रिटायरमेंट प्लानिंग आवश्यक है, ताकि आपको अपनी लाइफस्टाइल या फाइनेंशियल स्वतंत्रता से कोई समझौता न करना पड़े. अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों की पहचान करना और अपेक्षित खर्चों और आय के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करना बहुत जरूरी है. आपको रिटायरमेंट से पहले अपनी संपत्ति को कितना बढ़ाना होगा, यह समझने के लिए आप रिटायरमेंट कैलकुलेटर का भी उपयोग कर सकते हैं. इसके साथ ही, आप अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक पेंशन राशि जानने के लिए पेंशन कैलकुलेटर का भी उपयोग कर सकते हैं.

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है, भविष्य के लिए बचत करना. आपको शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि यह लाभदायक होने के बजाय नुकसानदायक है, खास तौर पर अगर आप युवा हैं तो. हालांकि, कंपाउंड ब्याज से आपको समय के साथ-साथ अपनी बचत को बढ़ाने में मदद मिलती है.

हालांकि रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करने के कई तरीके हैं, लेकिन कॉम्प्रिहेंसिव रिटायरमेंट प्लान में इन्वेस्ट करना एक अच्छा विचार है. इससे न केवल आपको फाइनेंशियल अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है, बल्कि आप बचत करने के लिए हर महीने पैसे अलग भी रख पाते हैं, ताकि आप लंबे समय तक के लिए नियमित आय पाने के लिए कॉर्पस बना सकें

रिटायरमेंट प्लान के प्रकार

भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग करने के लिए ऐसे कई रिटायरमेंट प्लान हैं, जिनमें इन्वेस्ट किया जा सकता है और उनसे यह पक्का करने में मदद मिल सकती है कि आपको रिटायरमेंट के बाद अपने हिसाब से जीवन जीने के लिए एक नियमित आय मिलती रहे. वर्तमान में, भारत में रिटायरमेंट प्लान में एन्युटी प्लान, रिटायरमेंट फंड, यूनिट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट प्लान और नेशनल पेंशन सिस्टम शामिल होते हैं.
1

इमीडिएट एन्युटी प्लान

एन्युटी प्लान से रिटायर्ड व्यक्ति को नियमित मासिक भुगतान मिलता है. यह रिटायरमेंट प्लान कैसे काम करता है? अगर आप एकमुश्त राशि को इन्वेस्ट करते हैं, तो एक साल के भीतर एन्युटी भुगतान मिलना शुरू हो जाता है. यह विकल्प खास तौर से उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो जल्दी ही रिटायर होने वाले हैं और जिन्हें एक व्यावहारिक विकल्प की आवश्यकता होती है. 

2

डेफर्ड एन्युटी प्लान

जैसा कि नाम से पता चलता है, इस तरह के एन्युटी प्लान ऊपर बताए गए प्लान से अलग तरीके से काम करते हैं. इसमें, इन्वेस्टर यह तय करता है कि उसे कितने समय में एन्युटी का भुगतान चाहिए. इस मामले में, कोई व्यक्ति रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा कॉर्पस बनाने के लिए एक निश्चित समय के दौरान छोटे-छोटे भुगतान करता है.

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वरिष्ठ नागरिक बचत योजना

सरकार द्वारा समर्थित इस स्कीम से लोगों को रिटायरमेंट के बाद एक नियमित आय मिलती है. इस तरह के प्लान का लाभ ऐसे रिटायर्ड व्यक्ति ले सकते हैं, जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है, या फिर जिनकी उम्र 55 से 60 वर्ष के बीच है.

एक वर्ष में न्यूनतम इन्वेस्टमेंट ₹ 1,000 हो सकता है, जबकि अधिकतम इन्वेस्टमेंट ₹ 15 लाख तक जाता है. इन्वेस्टमेंट की शुरुआती अवधि पांच वर्ष होती है, जो परिपक्वता के बाद अतिरिक्त तीन वर्ष तक की हो सकती है. ऐसे प्लान की वर्तमान ब्याज दर 2023-24 के लिए 8.2% प्रति वर्ष है.

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राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली

NPS का लाभ ऐसे व्यक्ति ले सकते हैं, जिनकी उम्र 18 से 70 के बीच होती है. इस प्लान के तहत एक फाइनेंशियल वर्ष में ₹ 2 लाख तक के टैक्स लाभ मिल सकते हैं और ये उन लोगों के लिए सबसे बेहतर है, जो मीडियम से लेकर हाई रिस्क लेने की क्षमता रखते हैं. ऐसा इसलिए है, क्योंकि इन्वेस्टमेंट मुख्य रूप से मार्केट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में होता है, जिनमें इक्विटी और डेट फंड शामिल होते हैं. इन्वेस्टर, कॉर्पोरेट, गवर्नमेंट बांड और किसी और इन्वेस्टमेंट फंड को चुन सकते हैं. जब इन्वेस्टर की उम्र 60 वर्ष हो जाती है, तब नेशनल पेंशन स्कीम अकाउंट मैच्योर हो जाता है. 

रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग क्यों करनी चाहिए?

आइए जानते हैं कि हमें रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग क्यों करनी चाहिए.

Preparing for a Longer Life

लंबे जीवन के लिए तैयारी

हेल्थकेयर सुविधाओं में बढ़ोत्तरी और हेल्दी लाइफस्टाइल के बारे में जागरूकता ने भारत के लोगों की औसत आयु 2015 के 68 वर्षों की तुलना में बढ़ाकर 2020 में 69.7 वर्ष कर दिया है. भारत की बढ़ती औसत आयु के साथ, लोगों को लंबी अवधि तक जीने की उम्मीद है और इस अनुसार उन्हें फाइनेंशियल प्लानिंग भी करनी होगी. रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब केवल पैसों की बचत करना ही नहीं है. यहां पर आपको यह भी ध्यान रखना होता है कि रिटायरमेंट की बचत रिटायरमेंट के वर्षों के दौरान पर्याप्त रहे. इसे प्राप्त करने के लिए, महंगाई, हेल्थकेयर की लागतों और अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए लंबे समय को ध्यान में रखते हुए रिटायरमेंट की प्लानिंग करनी चाहिए. लोगों को ऐसा रिटायरमेंट प्लान चुनना चाहिए, जो उन्हें तनाव-मुक्त रिटायरमेंट का मज़ा लेने और उनके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाए.

Fight Inflation

महंगाई से निपटना

महंगाई उस दर को दर्शाती है, जिस पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें समय के साथ बढ़ती हैं, जिससे पैसों की खरीद शक्ति कम होती है. रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय आपको जीवनयापन की लागत पर महंगाई के प्रभाव पर विचार करना चाहिए. अगर आप महंगाई की दर 5% मानते हैं, तो जीवनयापन की लागत 14 वर्षों में दोगुनी हो जाएगी. इसलिए, अगर आप 20 वर्षों में रिटायर होने वाले हैं, तो आपको वर्तमान जीवन स्तर बनाए रखने के लिए आज के मुकाबले दोगुनी से अधिक राशि की आवश्यकता होगी. रिटायरमेंट प्लान आपके पैसे इन्वेस्ट करने और महंगाई के प्रभाव से लड़ने में आपकी मदद करने वाले फंड बनाने के सुरक्षित तरीके खोजते हैं.

 Leave a Legacy

विरासत छोड़ें

रिटायरमेंट प्लानिंग की मदद से आप अपने प्रियजनों के लिए विरासत छोड़ सकते हैं. रिटायरमेंट प्लानिंग के जरिए आप धन जमा करते हैं, जिसका आप रिटायरमेंट के बाद इस्तेमाल कर सकते हैं और अपनी मृत्यु के बाद अपने प्रियजनों के लिए इसे छोड़ सकते हैं. रिटायरमेंट के लिए जल्दी बचत करना शुरू करके और गारंटीड रिटर्न देने वाले रिटायरमेंट प्लान में इन्वेस्ट करके, आप समय के साथ एक बड़ा फंड बना सकते हैं. आप इन पैसों को चैरिटी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और समाज के लिए एक आदर्श बन सकते हैं.

Maintain Your Standard of Living

अपना जीवन स्तर बनाए रखें

निर्णायक रूप से, रिटायरमेंट प्लानिंग, रिटायर होने के बाद अपना जीवन स्तर बनाए रखने में आपकी मदद करती है. रिटायरमेंट प्लानिंग में रिटायरमेंट के लक्ष्यों की पहचान करना, खर्चों का अनुमान लगाना और उन्हें पूरा करने के लिए पर्याप्त बचत जमा करने की योजना बनाना शामिल है. आप रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए रिटायरमेंट प्लान का उपयोग कर सकते हैं, जो आपकी नियमित आय की जगह लेने और आपके जीवन स्तर को बनाए रखने में मदद करने के लिए मासिक भुगतान प्रदान करता है. ये प्लान आपके फंड इन्वेस्ट करते हैं, इसलिए वे आपके फाइनेंस पर महंगाई के प्रभाव से लड़ने में मदद कर सकते हैं.

रिटायरमेंट प्लानिंग के लाभ

रिटायरमेंट प्लानिंग के कई फायदे या लाभ हैं - .
1

फाइनेंशियल स्वतंत्रता

अगर आपको अपने पूरे जीवन में एक नियमित आय मिली है, तो अपने रिटायरमेंट के बाद किसी दूसरे व्यक्ति पर फाइनेंशियल तौर पर निर्भर रहने में असहज महसूस करना स्वाभाविक है. रिटायरमेंट प्लान में इन्वेस्ट करके, आप नियमित भुगतान का लाभ ले सकते हैं और साथ ही उन लक्ष्यों को भी पूरा कर सकते हैं, जिन पर आप समय के अभाव में ध्यान नहीं दे पाए थे. यह रिटायरमेंट प्लानिंग के सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक है.

2

जीवन अपेक्षा

आज के समय में औसत उम्र 70-75 वर्ष होती है, इसलिए अगर आप 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होते है, तब आपको रिटायरमेंट के बाद कई वर्षों तक नियमित आय की ज़रूरत होगी. यहीं पर कॉम्प्रिहेंसिव रिटायरमेंट प्लान काम आते हैं. आप जल्दी से जल्दी 20 वर्ष या 30 वर्ष या 40 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग करना शुरू कर सकते हैं.

3

मेडिकल के खर्चे

मेडिकल उपचार की लागत बढ़ने के कारण, एमरजेंसी के लिए एक कॉर्पस होना ज़रूरी है. हालांकि, एक बेहतर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान से आपको नौकरी के दौरान इस तरह की एमरजेंसी से निकलने में मदद मिल सकती है, लेकिन अगर ऐसी स्थिति वृद्धावस्था में आती है, तो उसके लिए भी आपको मेडिकल खर्चों को ध्यान में रखना बेहतर होगा. ऐसा इसलिए है, क्योंकि अगर कोई व्यक्ति अक्सर बीमार होता रहता है, तो विशेषतौर पर वृद्धावस्था के दौरान अपनी जेब से खर्च करना बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं होता.

4

टैक्स लाभ

रिटायरमेंट प्लान में इन्वेस्ट करने से टैक्स की लायबिलिटी को कम करने में और अपनी सेविंग को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. आप इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80C के तहत प्लान के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम के लिए ₹1.5 लाख तक की कटौती का क्लेम कर सकते हैं. 

5

मन की शांति

कभी-कभी कम समय और लंबे समय की ज़रूरतों के लिए पैसों का प्रबंध करना बड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. कभी-कभी, स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अचानक से आ सकती हैं और इससे आपका बजट बिगड़ सकता है, विशेष रूप से अगर आप वृद्धावस्था में हैं और आपकी कोई नियमित आय नहीं है. रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ, आप बिना किसी तनाव के खुश और स्वस्थ रह सकते हैं.

रिटायरमेंट प्लान का महत्व

रिटायरमेंट प्लानिंग आपको भविष्य के लिए तैयार होने में मदद करती है. आइए समझते हैं कि आपको रिटायरमेंट प्लान की आवश्यकता क्यों है.

Prepare for Medical Emergencies

मेडिकल एमरजेंसी के लिए तैयार रहें

रिटायरमेंट प्लान आपको नियमित आय प्रदान करते हैं, जिसकी मदद से आप रिटायर होने के बाद अपने फाइनेंशियल दायित्वों को पूरा कर सकते हैं. उम्र बढ़ने के साथ-साथ आपको कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या मेडिकल एमरजेंसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनके लिए तुरंत देखभाल की ज़रूरत पड़ती है. इन पैसों से आप अपने हॉस्पिटल और मेडिकल बिलों का भुगतान कर सकते हैं, जिससे आप फाइनेंस की चिंता करने की बजाय अपने स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.

Remain Financially Independent

फाइनेंशियल रूप से स्वतंत्र रहें

कोई भी व्यक्ति दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहता है, खास तौर पर वह व्यक्ति तो कभी नहीं जिसने कई वर्षों तक कठिन परिश्रम किया है. रिटायरमेंट प्लान आपको रिटायर होने के बाद अपनी फाइनेंशियल स्वतंत्रता बनाए रखने में मदद करता है. इससे मिलने वाले भुगतान की मदद से आप अपने प्रियजनों पर निर्भर रहे बिना अपने खर्चों तथा फाइनेंशियल देयताओं का भुगतान कर सकते हैं.

Help Your Family

अपने परिवार की मदद करें

अपने रिटायरमेंट प्लान के साथ आप अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहारा दे सकते हैं. इससे मिलने वाले भुगतान से आप अपनी स्वतंत्रता बनाए रख सकते हैं और अपनी फाइनेंशियल स्थिति सही रख सकते हैं. अपने फंड के आधार पर, आप अपने प्रियजनों को भी उनके जीवन के विभिन्न लक्ष्य और सपने पूरे करने में मदद कर सकते हैं. रिटायरमेंट प्लान में जीवन बीमा की विशेषता भी शामिल होती है, जो आपको कुछ हो जाने की स्थिति में लाभार्थी को भुगतान प्रदान करता है. जीवन बीमा कवर यह सुनिश्चित करता है कि आपके प्रियजनों को फाइनेंशियल रूप से संघर्ष न करना पड़े.

Meet Your Financial Goals

अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करें

रिटायरमेंट प्लान आपको नियमित भुगतान प्रदान करते हैं, जिनकी मदद से आप अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं. यह राशि आपको अपने जीवन स्तर को बनाए रखने और महंगाई से आपके पैसों को सुरक्षित रखने में मदद करती है. इसके अलावा, यह राशि आपको एमरजेंसी फंड बनाने और किसी भी बकाया क़र्ज़ का पुनर्भुगतान करने में मदद करती है.

आपको रिटायरमेंट के लिए कहां इन्वेस्ट करना चाहिए?
 

भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए ऐसे कई रिटायरमेंट प्लान हैं, जिनमें इन्वेस्टमेंट किया जा सकता है, और उनसे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि आपको रिटायरमेंट के बाद एक अच्छी लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए नियमित आय मिलेगी. वर्तमान में, भारत में रिटायरमेंट प्लान में एन्युटी प्लान, रिटायरमेंट फंड, यूनिट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट प्लान और नेशनल पेंशन सिस्टम शामिल हैं. 

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सुझाव

अगर आप रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करना चाहते हैं, तो आप इन सुझावों का पालन कर सकते हैं:
1

आज से ही सेविंग शुरू करें

जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो जितनी जल्दी शुरू किया जाए उतना बेहतर होता है. जल्दी शुरू करने से आप बड़ा फंड बना सकते हैं, जो हर साल बढ़ता जाता है. कंपाउंड ब्याज की शक्ति लंबी अवधि में बेहतर काम करती है, इसलिए अपने 20 और 30 की उम्र में पेंशन प्लान खरीदने से आपकी रिटायर्ड लाइफ फाइनेंशियल रूप से सुरक्षित रहेगी.

2

भविष्य की फाइनेंशियल एमरजेंसी के लिए तैयार रहें

रिटायरमेंट के लिए प्लान करते समय आपको भविष्य की फाइनेंशियल एमरजेंसी पर भी विचार करना चाहिए. उदाहरण के लिए, हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदने से और मेडिकल खर्चों या अन्य एमरजेंसी स्थितियों में मदद करने के लिए आकस्मिक फंड बचाकर रखने से आपको रिटायर होने के बाद अपनी फाइनेंशियल स्वतंत्रता बनाए रखने में मदद मिलती है. 

3

जीवन बीमा विकल्प देखें

हर अच्छे फाइनेंशियल प्लान में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी शामिल होती है. आप अपने परिवार के फाइनेंशियल भविष्य को सुरक्षित करने और अपने पति/पत्नी को रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए तैयार करने में मदद करने के लिए टर्म प्लान लेने पर विचार कर सकते हैं. अपने सभी विकल्पों का मूल्यांकन करें और अपने प्रियजनों को पर्याप्त सहायता प्रदान करने वाली पॉलिसी खोजें.

4

अपने इन्वेस्टमेंट में विविधता लाएं

जब भविष्य के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग की बात आती है, तो आप सारा पैसा एक ही जगह पर इन्वेस्ट करने से बचेंगे. समय के साथ अच्छे रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए आपको अपने इन्वेस्टमेंट को डाइवर्सिफाई करने के तरीके खोजने होंगे. आदर्श रूप से, आपको ऐसे इन्वेस्टमेंट विकल्पों की तलाश करनी चाहिए जो आपके पैसों को विभिन्न फंड्स में इन्वेस्ट करे ताकि आपका रिस्क कम हो जाए. उपलब्ध विभिन्न इन्वेस्टमेंट और रिटायरमेंट प्लान का मूल्यांकन करें और अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुसार प्लान चुनें.

5

अपने रिटायरमेंट लक्ष्यों के बारे में सोचें

अंत में, रिटायरमेंट प्लान खरीदने से पहले यह समझ लें कि रिटायरमेंट के बाद के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आपको कितने पैसों की ज़रूरत होगी. इसमें भविष्य में यात्रा करने, कोई नया इंस्ट्रूमेंट बजाना सीखने या कंसल्टेंसी स्थापित करने जैसे खर्चों के लिए भी स्थान रखें. अपने लक्ष्यों की लिस्ट बनाएं और विचार करें कि उन पर कितना खर्च आएगा. अपनी ज़रूरत को समझने के बाद, आप लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्लान बना सकते हैं.

रिटायरमेंट प्लान कैसे काम करते हैं?
 

आदर्श रूप से, आपको जल्द से जल्द रिटायरमेंट प्लान में इन्वेस्ट करना शुरू कर देना चाहिए. इससे आपको लंबे समय में फाइनेंशियल तौर पर सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए रिटायरमेंट कॉर्पस जमा करने का पर्याप्त समय मिलेगा. कॉर्पस जमा हो जाने के बाद, आप उससे एन्युटी खरीद सकते हैं, इससे आपको रिटायरमेंट के बाद मासिक आय मिलेगी. इसके अलावा, एन्युटी में बदलाव होने के बाद भी, रिटायरमेंट कॉर्पस बढ़ता रह सकता है. रिटायरमेंट के बाद, एन्युटी का भुगतान आजीवन या फिर कुछ समय के लिए लिया जा सकता है. 

रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

हालांकि, हर व्यक्ति की उम्र, लक्ष्य, इन्वेस्टमेंट की लिमिट और मौजूदा लाइफस्टाइल के हिसाब से उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग रिटायरमेंट प्लान होते हैं, इसलिए यहां ध्यान में रहने योग्य कुछ सामान्य कारक बताए गए हैं:
1

रिटायरमेंट की अपेक्षित उम्र और इन्वेस्टमेंट की अवधि

आपको किस उम्र में रिटायरमेंट मिलने की उम्मीद है, उसका मूल्यांकन करना और उसके अनुसार आपके भविष्य की प्लानिंग करना महत्वपूर्ण है. रिटायरमेंट की कार्यनीति बनाने के लिए आपको अपनी मौजूदा उम्र, आपको किस उम्र में रिटायरमेंट मिलने की उम्मीद है, उस पर और इन्वेस्टमेंट की अपनी लिमिट पर विचार करना चाहिए. 

2

जोखिम उठाने का माद्दा

अगर कोई व्यक्ति रिटायरमेंट प्लानिंग जल्दी शुरू कर देता है, तो उनकी रिस्क लेने की क्षमता उस व्यक्ति से अधिक होने की संभावना होती है, जो देर से प्लानिंग शुरू करते है. इस मामले में, वे इक्विटी जैसे एसेट में इन्वेस्ट कर सकते हैं, जिसमें रिस्क तो हो सकता है, लेकिन रिटर्न भी बहुत अधिक मिलता है. 

3

मौजूदा फाइनेंशियल स्थिति

एक अन्य पहलू, जिसे रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय ध्यान रखा जाना चाहिए, वह है आपकी मौजूदा फाइनेंशियल स्थिति, आपके खर्च, लाइफस्टाइल और आपके सभी क़र्ज़. इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि रिटायरमेंट के लिए आपको कितनी बचत करने की आवश्यकता है. 

4

रिटायरमेंट की आवश्यकताओं पर होने वाला खर्च

हो सकता है कि आपको यह एक बहुत मुश्किल प्लान लगे, लेकिन हाउसिंग, स्वास्थ्य की देखभाल के साथ-साथ बढ़ती उम्र के साथ आ सकने वाले अन्य कई खर्चों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी होता है. इन खर्चों के लिए पहले से ही तैयार रहना एक अच्छा आइडिया है, क्योंकि इससे आपको भविष्य के लिए कॉम्प्रिहेंसिव रिटायरमेंट प्लानिंग करने में मदद मिलती है.

5

एसेट एलोकेशन प्लान

इसके अलावा, किसी इन्वेस्टमेंट से मिलने वाला रिटर्न कम भी हो सकता है, विशेषकर उच्च मुद्रास्फीति के मामले में. अपने इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों, इन्वेस्टमेंट की लिमिट, रिस्क लेने की क्षमता और इस तरह की अन्य आवश्यकताओं का मूल्यांकन करने के बाद, आप मार्गदर्शन के लिए एसेट एलोकेटर से सलाह ले सकते हैं. 


रिटायरमेंट प्लान की पात्रता

अगर आप रिटायरमेंट प्लान में इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए कुछ पात्रता मापदंडों को पूरा करना होगा. अधिकांश पेंशन प्लान के लिए, इन्वेस्ट करने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होती है, जबकि इसकी अधिकतम आयु 70 वर्ष तक हो सकती है. वार्षिक प्रीमियम राशि के बारे में बात करें, तो इसकी कोई अधिकतम लिमिट नहीं है. हालांकि, न्यूनतम वार्षिक प्रीमियम की राशि आमतौर पर ₹ 50,000 के लगभग होती है. अंत में, अधिकांश पेंशन प्लान की पॉलिसी अवधि 10 से 30 वर्षों के बीच होती है.

आप ऐसा रिटायरमेंट प्लान लेकर उसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं, जो आपकी ज़रूरतों और आवश्यकताओं को पूरा करता हो.


रिटायरमेंट प्लानिंग से संबंधित सामान्य प्रश्न 

 

1 रिटायरमेंट प्लानिंग में 4% का नियम क्या है?

रिटायरमेंट प्लानिंग में 4% के नियम की मदद से आप अपने फंड्स को 30 वर्षों तक चला सकते हैं. यह नियम बताता है कि आपको पहले वर्ष में अपने फंड का केवल 4% निकालना चाहिए, और बाद के हर वर्ष के लिए, महंगाई के अनुसार इस निकासी राशि में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए. 

2 रिटायरमेंट के 3 R क्या हैं?

रिटायरमेंट के 3 R हैं:

1. रिटायरमेंट प्लानिंग – इसमें आप अपने कामकाज के वर्षों के दौरान अपनी आय के एक हिस्से की बचत करते हैं, ताकि रिटायर होने के बाद आपको पर्याप्त सहायता मिल सके.

2. नियमित आय – रिटायर होने के बाद, आपके पास नियमित आय का कोई न कोई ज़रिया होना चाहिए. उदाहरण के लिए, पेंशन प्लान या एन्युटी खरीदने से आपको नियमित आय मिलती है, जिसकी मदद से आप अपने रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा कर सकते हैं और जीवनस्तर बनाए रख सकते हैं.

3. रिस्क मैनेजमेंट – रिटायर होने के बाद, आपको अपने रिस्क कम और मैनेज करने पड़ेंगे. आप कम रिस्क वाले इन्वेस्टमेंट माध्यमों में इन्वेस्ट कर सकते हैं, जो आपकी बचत को मुद्रास्फीति के प्रभाव से बचाते हुए स्थिर रिटर्न प्रदान करते हैं.

3 बेसिक रिटायरमेंट प्लान क्या हैं?

भारत में दो प्रकार के रिटायरमेंट प्लान उपलब्ध हैं, पेंशन प्लान और एन्युटी प्लान. रिटायर होने के बाद आपको फाइनेंशियल सुरक्षा प्रदान करने के लिए अक्सर ये दोनों प्रकार के प्लान मिलकर काम करते हैं. आप अपने 20 और 30 की उम्र में पेंशन प्लान खरीद सकते हैं. इन प्लान में आपके द्वारा डाले गए पैसों को आपकी ओर से इन्वेस्ट किया जाता है और इस प्रकार आपके रिटायरमेंट के लिए फंड बनता है. इसके बाद आप अपने शेष जीवन के लिए नियमित भुगतान प्रदान करने वाली एन्युटी खरीदने के लिए फंड का उपयोग कर सकते हैं.

4 रिटायरमेंट लाइफसाइकिल क्या है?

रिटायरमेंट लाइफसाइकिल में तीन चरण होते हैं:

1. प्री-रिटायरमेंट चरण – इस चरण के दौरान आप काम कर रहे होते हैं और रिटायरमेंट के लिए सेविंग और इन्वेस्टमेंट पर ध्यान केंद्रित करते हैं.

2. रिटायरमेंट चरण – रिटायरमेंट के बाद, इस चरण के लोग अपने रोज़मर्रा के खर्चों के लिए अपने इन्वेस्टमेंट पर निर्भर रहते हैं.

3. पोस्ट रिटायरमेंट चरण – इस चरण में, आयु से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लोगों को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है. कुछ व्यक्तियों को लॉन्ग-टर्म केयर की आवश्यकता पड़ सकती है, जो केवल प्री-रिटायरमेंट चरण में पर्याप्त फाइनेंशियल प्लानिंग के माध्यम से ही संभव होगा.

5 भारत में कानूनन रिटायरमेंट की आयु क्या है?

भारत में रिटायरमेंट की कानूनी आयु सेक्टर के अनुसार अलग-अलग होती है. प्राइवेट सेक्टर में कोई आयु निर्धारित नहीं है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए, रिटायरमेंट की आयु 60 वर्ष है, जबकि राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यह 58 वर्ष है. रक्षा कार्मिकों के लिए रिटायरमेंट की आयु उनके रैंक पर निर्भर करती है. सैनिक अक्सर 35 से 37 के बीच रिटायर हो जाते हैं, जबकि अधिकारी 58 वर्ष की आयु में रिटायर हो सकते हैं.

6 रिटायरमेंट के समय मुझे आदर्श रूप से कितनी आय की आवश्यकता होगी?

रिटायर होने के बाद आपको कितनी राशि चाहिए, यह आपके जीवन स्तर और अपेक्षित खर्चों पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए, किराए पर रह रहे व्यक्तियों को अपने खुद के घरों में रह रहे व्यक्तियों के मुकाबले अधिक राशि की आवश्यकता होगी, क्योंकि खुद के घर में रह रहे व्यक्तियों को केवल इसके रखरखाव पर होने वाले खर्च और टैक्स का भुगतान करना होगा. आप ऑनलाइन रिटायरमेंट प्लानिंग कैलकुलेटर का उपयोग करके बेहतर तरीके से समझ सकते हैं कि आपको कितनी राशि की आवश्यकता होगी.

7 डिफरमेंट या विलंब क्या होता है?

डिफरमेंट या विलंब का अर्थ होता है देरी से रिटायर होना और रिटायरमेंट की आयु के बाद भी काम करते रहना. यह दृष्टिकोण लोगों को अपनी बचत को बढ़ाने और अपने रिटायरमेंट फंड्स को निकालने में देरी करने में मदद करता है. यह लोगों को सक्रिय रहने और अपनी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मदद कर सकता है.

8 रिटायरमेंट प्लानिंग क्या है?

रिटायरमेंट प्लानिंग, रिटायरमेंट के लिए एसेट को अलग रखने की एक प्रोसेस है, ताकि आपको नियमित आय मिलना बंद हो जाने के बाद भी आप आरामदायक जीवन जी सकें और फाइनेंशियल तौर पर चिंतामुक्त रह सकें. संक्षेप में कहें, तो यह एक सेविंग प्रोग्राम है, जो रिटायरमेंट के बाद एसेट और रिस्क को मैनेज करता है.

9 आपके रिटायरमेंट की प्लानिंग करने के चरण कौन-से हैं?

अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय आपको इन चरणों का ध्यान रखना चाहिए. पहला चरण है, फाइनेंशियल लक्ष्य निर्धारित करना और यह समझना कि उन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कितनी राशि की ज़रूरत होगी. इसके बाद, इन्वेस्टमेंट की लिमिट जानने के लिए रिटायरमेंट की तिथि पता करें. आप रिटायरमेंट प्लानिंग कैलकुलेटर का उपयोग करके यह समझ सकते हैं कि आपको रिटायरमेंट से पहले अपनी संपत्ति को कितना बढ़ाने की ज़रूरत है. अंतिम चरण है, रिटायरमेंट प्लान खरीदना और फाइनेंशियल रूप से सुरक्षित भविष्य के लिए एक बड़ा कॉर्पस बनाने के लिए नियमित प्रीमियम का भुगतान करना.

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  1. इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अनुसार. टैक्स लाभ, टैक्स कानूनों में बदलाव के अधीन हैं.
  1. गारंटीड इनकम की राशि लागू नियम और शर्तों के अधीन होगी और भुगतान किए गए प्रीमियम पर निर्भर करेगी.

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