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इन्वेस्टमेंट प्लान

इन्वेस्टमेंट प्लान फाइनेंशियल प्रोडक्ट हैं, जो भविष्य के लिए धन बनाने का अवसर प्रदान करते हैं. इन्वेस्टमेंट प्लान ये लाभ प्रदान करते हैं ...अधिक पढ़ें

अपनी ज़रूरतों के अनुसार एच डी एफ सी लाइफ के विभिन्न इन्वेस्टमेंट प्लान देखें:

एच डी एफ सी लाइफ के इन्वेस्टमेंट प्लान के साथ आप अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों के अनुसार मार्केट लिंक्ड रिटर्न या गारंटीड 1 रिटर्न का विकल्प चुन सकते हैं -

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हम अपने कस्टमर की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखते हैं और उन्हें अनावश्यक मैसेज नहीं भेजते हैं.

मैं एच डी एफ सी लाइफ और इसके प्रतिनिधियों को कॉल, ईमेल, SMS या व्हॉट्सऐप के माध्यम से मुझसे संपर्क करने के लिए अधिकृत करता/करती हूं. यह सहमति DNC/NDNC के तहत मेरे रजिस्ट्रेशन को ओवरराइड करती है (इसका मतलब है कि अगर आप किसी डू नॉट डिस्टर्ब लिस्ट में रजिस्टर्ड हैं, तो भी हम आपसे संपर्क कर सकेंगे).

Investment Plans
Francis Rodrigues फ्रांसिस रॉड्रिग्स

फ्रांसिस रॉड्रिग्स के पास बीमा क्षेत्र में एक दशक का लंबा अनुभव है, और वे एच डी एफ सी लाइफ में SVP, ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की भूमिका में ऑनलाइन सेल्स चैनल के साथ-साथ डिजिटल और परफॉर्मेंस मार्केटिंग का प्रबंधन करते हैं. 2 दशकों के करियर में उन्हें शुरुआत से सेल्स चैनल और फंक्शनल टीम स्थापित करने का अच्छा खासा अनुभव रहा है.

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Author Profile लेखक:
Vishal Subharwal विशाल सुभरवाल

विशाल सुभरवाल एच डी एफ सी लाइफ में स्ट्रेटजी, मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, डिजिटल बिज़नेस और स्थिरता वाले पहलों का नेतृत्व करते हैं. वे पूरे संगठन के लिए स्ट्रेटजी बनाने और इसका सफल कार्यान्वन सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

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इन्वेस्टमेंट प्लान क्या होता है?

What is an Investment Plan?

इन्वेस्टमेंट प्लान फाइनेंशियल प्रोडक्ट हैं, जो भविष्य के लिए धन बनाने का अवसर प्रदान करते हैं. इन्वेस्टमेंट प्लान व्यक्तियों को विभिन्न फंड में अनुशासित तरीके से और आवधिक इन्वेस्टमेंट करने में मदद करता है, ताकि वे अपने भविष्य के फाइनेंशियल लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें.

इन्वेस्टमेंट प्लान कैसे चुनें?

How do you choose an Investment Plan?

अपने लिए इन्वेस्टमेंट प्लानिंग का सबसे पहला चरण यह है कि आप एक ऐसे इन्वेस्टमेंट को पहचानें, जो आपकी प्रोफाइल और आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप हो. इन्वेस्टमेंट प्लानिंग के लिए आवश्यक रिसर्च करने के बाद बड़ी सावधानी से इन्वेस्टमेंट चुनने की आवश्यकता होती है और ऐसी स्कीमों से बचें, जो कम समय में बड़ा रिटर्न देने का वादा करती हैं. नियमित रूप से अपने इन्वेस्टमेंट की जांच करते रहें और साथ ही इन्वेस्टमेंट विशेष के संबध में रिटर्न और कैपिटल गेन पर लगने वाले टैक्स पर नज़र बनाए रखें. भारत में, सभी के लिए सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट प्लान उपलब्ध है, जो उनके लिए उपयोगी हो सकता है.

16 इन्वेस्टमेंट प्लान, जिनमें से आप चुन सकते हैं

नीचे दिए गए कुछ इन्वेस्टमेंट विकल्प हैं जिनसे आप अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों के अनुसार अपने लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकते हैं -

1

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

पारंपरिक रूप से भारत में सबसे अच्छा और सबसे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट विकल्प माना जाने वाला PPF सबसे लोकप्रिय स्मॉल सेविंग स्कीम में से एक है. PPF अकाउंट होल्डर एक फाइनेंशियल वर्ष में ₹1.5 लाख तक इन्वेस्ट कर सकते हैं जबकि न्यूनतम डिपॉजिट की राशि ₹500 है. डिपॉजिट एकमुश्त तरीके से या 12 किश्तों में किए जा सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत PPF डिपॉजिट इनकम में से कटौती के लिए पात्र हैं. इनकम टैक्स के संदर्भ में बात करें, तो PPF अकाउंट EEE (एग्जेंप्ट, एग्जेंप्ट, एग्जेंप्ट) के लिए भी पात्र हैं, जिसका मतलब है कि एक इन्वेस्टर को सभी तीन स्तरों - इन्वेस्टमेंट, आय और निकासी - पर टैक्स नहीं देना पड़ता है.

2

म्यूचुअल फंड

म्यूचुअल फंड डीलर आपको विभिन्न मैट्रिक्स जैसे-जोखिम, रिटर्न और कीमत आदि के आधार पर फंड की तुलना करने की सुविधा देते हैं. क्योंकि इसमें इन्फॉर्मेशन को आसानी से एक्सेस किया जा सकता है, इसलिए इन्वेस्टर बुद्धिमानी से इन्वेस्ट करने का निर्णय ले सकता है. इसके अलावा, म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के लाभ भी मिलते हैं. ELSS एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है जो आपको 80C के तहत टैक्स बचाने में मदद कर सकता है, इसके साथ ही आपको म्यूचुअल फंड फीस पर भी विचार करना चाहिए.

3

डायरेक्ट इक्विटी

डायरेक्ट प्लान में आप कमीशन और मार्केटिंग पर होने वाले खर्च से बच जाते हैं. इस स्कीम में छोटी राशि का इन्वेस्ट किया जाता है, जो आपको लंबे समय में अतिरिक्त रिटर्न देने में मदद कर सकते हैं.

4

रियल एस्टेट निवेश

भारत में रियल एस्टेट सेक्टर में इन्वेस्टमेंट करना सबसे अच्छा और लाभदायक है, क्योंकि इसमें विकास की संभावनाएं बहुत हैं और इसका मार्केट बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है.

5

गोल्ड में निवेश

गोल्ड में निवेश करके आप अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई कर सकते हैं और इसे मार्केट के उतार चढ़ाव से बचा सकते हैं. यह इन्वेस्टमेंट महंगाई की दर से अधिक रिटर्न देता है, जिससे यह एक सुरक्षित विकल्प बन जाता है. गोल्ड में इन्वेस्ट करने के लिए आपको मार्केट की जानकारी की ज़रूरत नहीं होती, जिससे हर व्यक्ति के लिए भविष्य के लिए पैसे बचाना आसान हो जाता है. अंत में, गोल्ड इन्वेस्टमेंट में उच्च लिक्विडिटी होती है, जो फाइनेंशियल एमरजेंसी के दौरान उपयोगी साबित होती है.

 

6

पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम

पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम सरकारी इन्वेस्टमेंट स्कीम है. यह आकर्षक ब्याज दरों पर बहुत से सेविंग और डिपॉजिट विकल्प प्रदान करती है, और आपको भविष्य के लिए एक बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद करती है. ये इन्वेस्टमेंट गारंटीड रिटर्न प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें कम जोखिम वाला इन्वेस्टमेंट विकल्प मिलता है.

7

कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां और RBI से लाइसेंस प्राप्त अन्य फाइनेंशियल संस्थान विभिन्न कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट ऑफर करते हैं. इन्वेस्टर्स को पूरी अवधि के दौरान फिक्स ब्याज दर मिलती है और वे स्थिर रिटर्न प्राप्त कर पाते हैं. 

8

इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (IPO)

IPO, स्टॉक मार्केट के जरिए जनता को सिक्योरिटीज़ बेचने की सुविधा देता है. इस प्रकार के इन्वेस्टमेंट में ग्रोथ की संभावनाएं बहुत अधिक होती है और ये लंबी अवधि में बहुत अच्छे रिटर्न दे सकते हैं. हालांकि, इनमें जोखिम भी बहुत अधिक होता है और अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है, तो आपका पैसा डूब भी सकता है.

9

ULIP (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान)

ULIP बहुत से लाभ प्रदान करते हैं और साथ ही इन्वेस्टमेंट और बीमा, दोनों के लाभ भी देते हैं. भारत के सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट विकल्पों में से एक ULIP को टैक्स लाभ के लिए जाना जाता है.

10

बॉन्ड्स

बॉन्ड कम जोखिम और निश्चित आय वाली सिक्योरिटीज़ होते हैं, जो इन्वेस्टर्स को एक स्थिर आय प्रदान करते हैं. इनकी मदद से इन्वेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई कर सकते हैं और उच्च जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट को बैलेंस कर सकते हैं. कई सरकारी बॉन्ड मुद्रास्फीति-समायोजित रिटर्न प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें भविष्य के लिए एक स्थिर इन्वेस्टमेंट के रूप में काम में लिया जा सकता है.

11

बैंक FD

बैंक फिक्स डिपॉज़िट भारत में अत्यंत लोकप्रिय हैं. संचयी/गैर-संचयी विकल्पों के साथ, बैंक FD इन्वेस्टमेंट अवधि पर फिक्स्ड रिटर्न प्रदान करते हैं और बैंक की पॉलिसी के आधार पर मासिक, वार्षिक या द्वि-वार्षिक आधार पर रिटर्न देय होते हैं.

12

सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम (एससीएसएस)

SCSS एक सरकारी स्कीम है, जो विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के इन्वेस्टर्स के लिए बनी है. यह एक स्थिर आय का विकल्प और टैक्स लाभ प्रदान करती है, जिससे यह कम जोखिम वाला विकल्प बन जाती है. आमतौर पर, SCSS में दूसरे विकल्पों के मुकाबले बेहतर ब्याज दर मिलती है, जिससे यह सीनियर सिटिज़न के लिए एक अच्छा इन्वेस्टमेंट विकल्प बन जाती है.

13

RBI टैक्सेबल बॉन्ड

भारत सरकार विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से समय-समय पर RBI टैक्सेबल बॉन्ड जारी करती है. ये बॉन्ड सुरक्षित होते हैं और एक निश्चित अवधि के बाद निश्चित रिटर्न देते हैं. इनसे इन्वेस्टर्स को रिटर्न तो मिलता ही है, साथ ही उनकी कैपिटल भी सुरक्षित रहती है.

14

राष्ट्रीय पेंशन योजना

यह भारत के सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा चलाया जाने वाला पेंशन प्रोडक्ट है और इसमें इक्विटी डेट, कॉर्पोरेट डेट और सरकारी बॉन्ड के आधार पर प्लान प्रदान किए जाते हैं. NPS में एक वर्ष में कम से कम ₹6,000 का जमा करना आवश्यक है, जबकि जमा करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है.

एच डी एफ सी लाइफ आपके फाइनेंस को सुरक्षित करने के लिए व एक मजबूत फाइनेंशियल आधार तैयार करने में आपकी मदद करने के लिए सेविंग और इन्वेस्टमेंट प्लान प्रदान करता है.

15

लाइफ इंश्योरेंस

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बचत या इन्वेस्टमेंट घटक के साथ-साथ जीवन बीमा कवरेज प्रदान करती है. सेविंग प्लान या रिटायरमेंट प्लान जैसी पॉलिसी वर्तमान में आपके परिवार की सुरक्षा करते हुए भविष्य के लिए आपके पैसों को बढ़ाने के तरीके प्रदान करती हैं. यदि पॉलिसी अवधि के दौरान इन्वेस्टर की मृत्यु हो जाती है तो लाभार्थी को बीमा राशि का भुगतान प्राप्त होता है. जीवित रहने पर, पॉलिसीधारक को मेच्योरिटी लाभ मिलता है.

16

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC)

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली फिक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट स्कीम द्वारा समर्थित एक सेविंग विकल्प है. आप इस फाइनेंशियल टूल से गारंटीड रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं.

इन्वेस्टमेंट प्लान के लाभ

इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान विभिन्न प्रकार के लाभ प्रदान करते हैं. जब अपने लिए सबसे अच्‍छा इन्वेस्टमेंट प्लान चुनने की बात आती है, तो आपको अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों और आकांक्षाओं की तुलना में किसी खास इन्वेस्टमेंट प्लान के लाभों का आकलन करना चा‍हिए. इन्वेस्टमेंट प्लान के कुछ सामान्य लाभ नीचे दिए गए हैं:

Wealth Accumulation with Investment Plans

धन संचय

हर इन्वेस्टमेंट का पहला लक्ष्य भविष्य के लिए पैसे बनाना और बचाना है. PPF और FD में पैसे समय के साथ निरंतर बढ़ते रहते हैं. वन टाइम इन्वेस्टमेंट प्लान (जैसे PPF और FD) बिना किसी बड़े जोखिम के आपको संपत्ति की वृद्धि करने में मदद कर सकता है.

Meeting Financial Goals with Investment Plans

फाइनेंशियल लक्ष्यों को पाना

ULIPs, NPS और रिटायरमेंट प्लान जैसे इन्वेस्टमेंट माध्यम, आपको विशिष्ट फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पैसा बनाने में सक्षम बनाते हैं.

Beating Inflation with Investment Plans

मुद्रास्फीति से मुकाबला

गोल्ड, रियल एस्टेट और इन्फ्लेशन-एडजस्टेड बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट आपको वेल्थ बनाने में मदद करते हैं ताकि मुद्रास्फीति आपके जीवनयापन के स्तर को प्रभावित न करे.

Earn Passive Income with Investment Plans

पैसिव इनकम कमाएं

आप अपनी बचत को विभिन्न इन्वेस्टमेंट माध्यमों में इन्वेस्ट कर सकते हैं, ताकि आपको वेतन के अलावा पैसिव इनकम भी मिलती रहे. पैसिव इनकम स्ट्रीम आपको भविष्य के लिए फाइनेंशियल सेफ्टी नेट बनाने में मदद करती है.

Tax  Benefit with Investment Plans

टैक्स लाभ

ULIPs, PPFs, NPS, टैक्सेबल बॉन्ड और मनी बैक पॉलिसी सहित कई इन्वेस्टमेंट विकल्प, इन्वेस्टर को टैक्स लाभ प्रदान करते हैं. इन्वेस्टर्स, इन्वेस्ट की गई राशि पर कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं और अपनी कुल टैक्स देयता कम कर सकते हैं. इसके अलावा, कुछ मेच्योरिटी रिटर्न और लाइफ इंश्योरेंस भुगतान भी टैक्स-फ्री होते हैं.

Financial Independence

फाइनेंशियल स्वतंत्रता

इन्वेस्टमेंट आपको भविष्य के लिए पैसा जमा करने में मदद करते हैं, जिसकी मदद से आप रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में भी फाइनेंशियल रूप से स्वतंत्र रह सकते हैं. सबसे अच्छे इन्वेस्टमेंट विकल्प आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों के अनुसार फाइनेंशियल स्वतंत्रता प्राप्त करने में आपकी मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.

Looking After Loved Ones

प्रियजनों की देखभाल

जीवन बीमा पॉलिसी या जीवन बीमा प्रदान करने वाले प्लान में इन्वेस्टमेंट करने से आपके न रहने पर भी आपके प्रियजनों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है. ये प्लान आपके लाभार्थी को भुगतान प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें क़र्ज़ चुकाने, अपने जीवन स्तर बनाए रखने या भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिल सकती है.

एचडीएफसी लाइफ के इन्वेस्टमेंट प्लान

हम आपकी खास फाइनेंशियल ज़रूरतों को पूरा करने वाले सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट प्लान खोजने में आपकी मदद कर सकते हैं.

आपके लिए एच डी एफ सी लाइफ का कौन सा ULIP प्लान सबसे सही है?

एच डी एफ सी लाइफ में, हमारे पास कई ULIP प्लान उपलब्ध हैं, इसलिए आप वह प्लान चुन सकते हैं जो आपकी फाइनेंशियल आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त है. हमारे द्वारा सुझाए गए सर्वश्रेष्ठ समाधान, जो आपके लिए उपयुक्त हैं

विशेषज्ञों से जानें

Vishal Subharwal

विशाल सुभरवाल

चीफ मार्केटिंग ऑफिसर और ग्रुप हेड

विशेषज्ञों से जानें

Quote Startएच डी एफ सी लाइफ के पास इन्वेस्टमेंट से जुड़ी आपकी सभी आवश्यकताओं के लिए लाइफ कवर के साथ समाधान उपलब्ध है. हमारे गारंटीड सेविंग्स प्लान आपको मार्केट के उतार-चढ़ाव की चिंता किए बिना 100% गारंटीड रिटर्न प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं. हमारे ULIP आपको मार्केट लिंक्ड एसेट में इन्वेस्ट करने का अवसर देते हैं, जिससे आपको अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी पूंजी बनाने में मदद मिलती है.Quote Start End


इन्वेस्टमेंट प्लान के साथ टैक्स लाभ 

वर्तमान टैक्स कानूनों के अनुसार, हर इन्वेस्टमेंट माध्यम पर अलग-अलग तरीके से टैक्स लागू होता है. नीचे दी गई टेबल संबंधित इन्वेस्टमेंट प्लान के लिए उपलब्ध टैक्स लाभ प्रदर्शित करती है -

 

इन्वेस्टमेंट का प्रकार

टैक्स लाभ

PPF

इन्वेस्ट की गई राशि इनकम टैक्स एक्ट,1961 के सेक्शन 80C के तहत कटौती योग्य है, जो ₹1,50,000/- की लिमिट के अधीन है जिसमें अन्य मदों में हुई कटौतियां भी शामिल हैं. एक्ट की धारा 10 के तहत, प्राप्त मेच्योरिटी और ब्याज राशि भी टैक्स-फ्री होती है

म्यूचुअल फंड


म्यूचुअल फंड में विभिन्न फंड जैसे इक्विटी, डेट या हाइब्रिड में इन्वेस्ट की गई यूनिट शामिल हैं. 

इक्विटी-लिंक्ड म्यूचुअल फंड स्कीम में इन्वेस्टमेंट, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स कटौती के लिए पात्र है.

डायरेक्ट इक्विटी

इन्वेस्टमेंट टैक्स कटौती के लिए पात्र नहीं है और प्राप्त आय पूरी तरह से टैक्सेबल होती है. 

रियल एस्टेट निवेश

ये इन्वेस्टमेंट पूरी तरह से टैक्सेबल हैं, चाहे इन्वेस्टमेंट शॉर्ट टर्म हो या लॉन्ग टर्म.

गोल्ड इन्वेस्टमेंट

गोल्ड में इन्वेस्टमेंट पर टैक्स लगता है. टैक्स का निर्धारण इन्वेस्टमेंट के शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म होने के आधार पर होता है.

पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट

पांच वर्ष के डिपॉजिट में इन्वेस्टमेंट, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स कटौती के लिए पात्र हैं. 

कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट

फिक्स्ड डिपॉजिट पर अर्जित ब्याज पर टैक्स लगता है.

IPO

IPO में इन्वेस्टमेंट पर टैक्स कटौती का लाभ नहीं मिलता तथा इससे होने वाली आय को कैपिटल गेन माना जाता है, जिस पर टैक्स लगता है.

यूएलआईपी

आपके ULIP के लिए भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ के लिए पात्र हैं. आप इस सेक्शन के तहत प्रति वर्ष ₹ 1, 50,000 की अधिकतम कटौती का क्लेम कर सकते हैं, जो इसमें उल्लिखित शर्तों के अधीन है. 

अगर किसी भी वर्ष में भुगतान किया गया प्रीमियम ₹ 2,50,000 से अधिक नहीं है और यह डेथ सम इंश्योर्ड के 10% से अधिक नहीं है, तो ULIP प्लान पर मेच्योरिटी प्राप्तियों पर टैक्स छूट उपलब्ध होगी.

आपके लाभार्थी या नॉमिनी को भुगतान किए गए डेथ बेनेफिट पर टैक्स नहीं लगता है. उन्हें बिना किसी टैक्स का भुगतान किए पूरा सम अश्योर्ड मिलेगा.

बॉन्ड्स 

बॉन्ड पर अर्जित ब्याज और कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है.  

बैंक FD

फिक्स्ड डिपॉजिट पर अर्जित ब्याज पर टैक्स लगता है. हालांकि, सीनियर सिटीज़न के लिए ₹50,000 तक का लाभ उपलब्ध है/-

SCSS

इन्वेस्टमेंट सेक्शन 80C के तहत टैक्स कटौती योग्य हैं, जो ₹1, 50,000/- की निर्दिष्ट लिमिट के अधीन है, अर्जित ब्याज पर टैक्स लगता है. हालांकि, सीनियर सिटीज़न सेक्शन 80TTB के तहत अर्जित ब्याज पर प्रति वर्ष ₹ 50,000 तक की कटौती का क्लेम कर सकते हैं#


NPS


NPS में योगदान की कटौती का क्लेम इनकम टैक्स एक्ट,1961 के सेक्शन 80CCD के तहत किया जा सकता है, जिसमें सेक्शन 80CCD(2) # के तहत ₹50,000/- की अतिरिक्त कटौती शामिल है. हालांकि, सेक्शन 80CCE# में निर्धारित किए अनुसार, कुल कटौती ₹1, 50,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए.

मेच्योरिटी कॉर्पस का 60% तक टैक्स-फ्री रूप से निकाला जा सकता है.

लाइफ इंश्योरेंस


आपके जीवन बीमा प्लान के लिए भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ के लिए पात्र हैं*. आप इस सेक्शन के तहत प्रति वर्ष ₹ 1, 50,000 की अधिकतम कटौती का क्लेम कर सकते हैं, जो इसमें उल्लिखित शर्तों के अधीन है. 

मेच्योरिटी लाभ पर छूट उन पॉलिसी के लिए उपलब्ध होती है, जहां किसी भी वर्ष में भुगतान किए गए प्रीमियम ₹5 लाख से कम होते हैं और ये डेथ सम इंश्योर्ड के 10% से अधिक नहीं होते हैं.


आपके लाभार्थी या नॉमिनी को भुगतान किए गए डेथ बेनेफिट पर टैक्स नहीं लगता है. उन्हें बिना किसी टैक्स का भुगतान किए पूरा सम अश्योर्ड मिलेगा.

जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर इन्वेस्टमेंट प्लान

अपनी इन्वेस्टमेंट प्लान का मूल्यांकन करते समय, आपको अपनी जोखिम लेने की क्षमता पर विचार करना चाहिए. उच्च जोखिम उठाने की क्षमता वाले व्यक्ति अधिक रिटर्न अर्जित करने के लिए अधिक जोखिम उठाने के लिए तैयार होते हैं. हालांकि, जो लोग कम जोखिम उठाने की इच्छा रखते हैं, वे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट विकल्पों पर निर्भर करते हैं. ऐसी स्थिति में रिटर्न बहुत ज्यादा नहीं होते, लेकिन वे मार्केट से जुड़े जोखिमों से बहुत कम प्रभावित होते हैं. आइए समझते हैं कि आपकी जोखिम लेने की क्षमता आपके इन्वेस्टमेंट विकल्पों को कैसे प्रभावित करती है.

High returns Investments

उच्च जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट

अधिकांश मार्केट लिंक्ड इन्वेस्टमेंट को उच्च जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट माना जाता है. इनमें बहुत अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं. हालांकि, वे मार्केट से लिंक्ड होते हैं और काफी उतार-चढ़ाव का सामना करते हैं. स्टॉक, म्यूचुअल फंड, IPO और इक्विटी-हेवी यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान आदि सभी उच्च जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट माने जाते हैं.

Medium-Risk Investments

मध्यम-जोखिम वाले निवेश

इन इन्वेस्टमेंट माध्यमों का उद्देश्य जोखिम और रिटर्न को बैलेंस करना है. इनमें उच्च जोखिम वाले तथा सुरक्षित इन्वेस्टमेंट विकल्पों का मिश्रण होता है, जिससे मार्केट गिरने पर स्थिर रिटर्न मिलते हैं. डेट और बैलेंस्ड म्यूचुअल फंड, सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड, और गोल्ड इन्वेस्टमेंट इस कैटेगरी में आते हैं.

 Low Risk Investments

कम-जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट

कम जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट में आपको बहुत कम या शून्य जोखिम का सामना करना पड़ता है. PPF, NPS, पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम, बैंक और कंपनी FD, SCSS, RBI टैक्सेबल बॉन्ड और पारंपरिक जीवन बीमा प्लान आदि सभी कम जोखिम कैटेगरी में आते हैं. इन विकल्पों जैसे सबसे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट विकल्प की मदद से कम जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट माध्यमों में इन्वेस्ट करने के बाद भी आप अपनी वेल्थ बढ़ा सकते हैं.


आपको इन्वेस्टमेंट प्लान में इन्वेस्ट करना कब शुरू करना चाहिए?

क्या आप इस प्रश्न से परेशान हैं - इन्वेस्टमेंट क्या है?
 

इन्वेस्टमेंट लगातार जारी रहने वाली एक जर्नी है न कि कोई निश्चित लक्ष्य है. यह एक ऐसी प्रोसेस है, जिसमें आप एक लक्ष्य को ध्यान में रख कर कई फाइनेंशियल निर्णय लेते हैं, रिटर्न कमाते हैं और अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को बिना अधिक जोखिम उठाए प्राप्त कर हैं. जब आप युवा होते हैं, तो उस समय इन्वेस्ट करना सबसे अच्छा होता है. हालांकि ऐसा करना तभी अच्छा है, जब आपने इन्वेस्ट करने से पहले अपने सभी कर्ज़ चुका दिए हों और आपने न्यूनतम इतना एमरजेंसी फंड बना लिया है, जो आपकी नौकरी जाने पर आपको कम से कम 3 महीने की इनकम के बराबर हो. अगर ऐसा है तो अभी तुरंत इन्वेस्ट कर सकते हैं, फिर भले ही आप 20 साल के हों, 30 साल के हों या फिर आपकी उम्र 50 साल हो. आप ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं और इन्वेस्टमेंट की राशि, समय अवधि, अपेक्षित रिटर्न दर और इन्वेस्टमेंट की फ्रीक्वेंसी जैसे कुछ आसान इनपुट के साथ अपने इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न के रूप में मिलने वाली राशि की गणना कर सकते हैं. अगर आप अपनी रिटायरमेंट आवश्यकताओं के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो आप रिटायरमेंट कैलकुलेटर की मदद से आवश्यक कॉर्पस का मूल्यांकन कर सकते हैं और अगर आप अपनी पेंशन आवश्यकता का आकलन करना चाहते हैं, तो आप पेंशन कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं.

 

आपको इन्वेस्ट क्यों करना चाहिए?

इन्वेस्टमेंट, सेविंग के लिए आपके द्वारा किया गया प्रयास है, जिसका उद्देश्य अपनी संपत्ति में बढ़ोत्तरी करना और अतिरिक्त इनकम या लाभ प्राप्त करना है.

अपने जीवन के हर माइलस्टोन के साथ, आप यह सुनिश्चित करते हैं कि आपके परिवार के सपने और आवश्यकताएं पूरी हों, आप छुट्टियों की योजना बनाते हैं और छुट्टियों पर जाते हैं, शादी करते हैं, अध्ययन करने के लिए विदेश जाते हैं, साथ ही किसी अप्रत्याशित घटना आदि के लिए तैयार रहते हैं. इसलिए, आपको अपनी बचत को प्लान करने और इन्वेस्ट करने की आवश्यकता होती है. यह प्लानिंग आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों पर निर्भर करती है. यह इन्वेस्टमेंट आपको उन लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा और आपको पैसों से पैसे कमाने की सुविधा देगा, जिससे आप फाइनेंशियल स्वतंत्रता प्राप्त कर सकेंगे.


इन्वेस्टमेंट प्लान कैसे चुनें?

इन्वेस्टमेंट प्लान चुनने के लिए, आपको अपने उद्देश्यों, लिक्विडिटी की आवश्यकताओं, इन्वेस्टमेंट की अवधि और अपनी जोखिम क्षमता के बारे में जानना होगा. एक बार जब आपका लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है, तो आपके लिए प्लान चुनना बहुत आसान हो जाता है. आप स्टॉक, म्यूचुअल फंड, बैंक डिपॉजिट, PPF आदि जैसे फाइनेंशियल एसेट में या गोल्ड या रियल एस्टेट जैसे नॉन-फाइनेंशियल एसेट में इन्वेस्ट कर सकते हैं.

विभिन्न प्रकार के इन्वेस्टमेंट में से चुनने के लिए, हम आपको इन मापदंडों का पालन करने की सलाह देते हैं:

  1. पर्याप्त रिसर्च करें
  2. कुछ ही समय में उच्च रिटर्न देने का वादा करने वाली स्कीमों से सावधान रहें
  3. अपने इन्वेस्टमेंट को समय-समय पर रिव्यू करें
  4. अपने रिटर्न और इन्वेस्टमेंट पर टैक्स संबंधी प्रभावों का आकलन करें.
  5. आप जितनी कम उम्र में इन्वेस्ट करना शुरू कर देते हैं, उतना ही बेहतर होता है.


इन्वेस्टमेंट प्लान खरीदने के लिए किन डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होती है?

इनकम प्रूफ

एड्रेस प्रूफ

आयु प्रमाण

आइडेंटिटी प्रूफ

वेतनभोगी व्यक्ति

स्व व्यवसायी

वोटर ID

PAN कार्ड

आधार कार्ड

फॉर्म 16

फॉर्म 26 AS

आधार कार्ड

PAN कार्ड

आपकी सेलरी क्रेडिट दिखाने वाला बैंक स्टेटमेंट.

पिछले 2 वर्षों के IT रिटर्न, जो इनकम कंप्यूटेशन के साथ एक साथ फाइल नहीं किए गए हैं

पासपोर्ट

 

वोटर ID

पिछले 2 वर्षों के IT रिटर्न

इनकम कंप्यूटेशन, अगर उपलब्ध नहीं है, तो ITR का वर्ष, जो एक साथ फाइल नहीं किए गए हैं

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जिसमें एड्रेस, आधार नंबर और नाम दिया गया हो.

नगरपालिका से बना जन्म प्रमाणपत्र

पासपोर्ट

पिछले 2 वर्षों का P&L अकाउंट और CA द्वारा जारी बैलेंस शीट

केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया कोई अन्य डॉक्यूमेंट.

वोटर ID

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 सेविंग प्लान और इन्वेस्टमेंट प्लान में क्या अंतर है?

'सेविंग' और 'इन्वेस्टिंग' शब्दों का इस्तेमाल अक्सर एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है, लेकिन हमेशा इनका उपयोग सटीक नहीं होता. सेविंंग और इन्वेस्टमेंट, दो अलग-अलग प्रकार के फाइनेंशियल टूल हैं, जिनका उपयोग विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है.

सेविंग: इसका अर्थ है भविष्य में इस्तेमाल करने के लिए थोड़े पैसे अलग से निकाल कर रखना. आमतौर पर इन पैसों को सेविंग अकाउंट में रखा जाता है, ताकि एमरज़ेंसी की स्थितियों में इनको आसानी से एक्सेस किया जा सके.

इन्वेस्टमेंट: दूसरी ओर, इन्वेस्टमेंट आपके पैसे को बढ़ाने में मदद करने के लिए बॉन्ड, स्टॉक, रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड जैसे एसेट खरीदने को दर्शाता है.

एक ओर जहां सेविंग प्लान आपको समय के साथ फंड बनाने में मदद करता है, वहीं इन्वेस्टमेंट प्लान आपको ऐसे माध्यम प्रदान करता है जिनकी मदद से आप अपने पैसों में वृद्धि कर सकते हैं.

2 मुझे इन्वेस्टमेंट प्लान क्यों चुनना चाहिए?

हम सभी अपने जीवन में कोई न कोई लक्ष्य रखते हैं. इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक अच्छा इन्वेस्टमेंट प्लान होना बहुत आवश्यक है. आज के समय में, केवल कमाना और बचत करना ही पर्याप्त नहीं है. घर खरीदने या फाइनेंशियल रूप से सुरक्षित रिटायरमेंट प्राप्त करने के लिए, यह बहुत ज़रूरी है कि आप ऐसे इन्वेस्टमेंट माध्यम खोजें जो समय के साथ आपके पैसों में बढ़ोत्तरी कर सकें. याद रखें, इन्वेस्ट करने से पहले अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना आवश्यक है, ताकि आप इन्वेस्टमेंट प्रोसेस को इनके अनुसार निर्धारित कर सकें.

3 मुझे शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान में से किसे चुनना चाहिए?

इसका जवाब मुख्य रूप से आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों पर निर्भर करेगा. हालांकि, आपके पोर्टफोलियो में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म, दोनों प्रकार के इन्वेस्टमेंट का अच्छा मिश्रण होना बेहतर रहेगा. शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान आपको अपने शॉर्ट-टर्म के फाइनेंशियल लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाएंगे, जैसे कि कार खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे बचाना, जबकि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान आपको घर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे बनाने जैसे अपने लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बना सकेंगे. संक्षेप में कहें तो, लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान आमतौर पर सुरक्षित इन्वेस्टमेंट टूल्स माने जाते हैं और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न प्राप्त करने के लिए उपयोग किए जाते हैं.

4 मैं अपने इन्वेस्टमेंट से कितने पैसे निकाल सकता/सकती हूं?

इसके लिए कोई नियम निर्धारित नहीं है और लॉक-इन-पीरियड न होने पर आप समय-समय पर पैसे निकाल सकते हैं. आप एकमुश्त राशि निकाल सकते हैं या अपनी आवश्यकता के अनुसार राशि निकाल सकते हैं. हालांकि, अगर आपको किसी एमरज़ेंसी स्थिति या किसी विशेष लक्ष्य के लिए पैसों की बहुत अधिक आवश्यकता है, तो ही आपको पैसे निकालने चाहिए. अगर आपको लाभ होता है तो आप उन पैसों को दोबारा इन्वेस्ट कर सकते हैं. लेकिन ऐसा करने से पहले आपको इसमें लगने वाले शुल्कों और इसके टैक्स प्रभावों पर विचार कर लेना चाहिए.

5 उच्चतम रिफंड के साथ आने वाला सबसे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट कौन सा है?

ऐसे बहुत से इन्वेस्टमेंट माध्यम हैं जो आपको अच्छे रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन अगर आप तय नहीं कर पा रहे हैं तो आपको सबसे पहले अपनी आवश्यकताओं और जोखिम लेने की क्षमता का आकलन करना होगा और उसके अनुसार अपने लिए सबसे उपयुक्त इन्वेस्टमेंट विकल्प चुनना होगा. भारतीय लोग आमतौर पर सरकार समर्थित इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें सुरक्षित माना जाता है लेकिन निम्नलिखित विकल्प भी आपको अच्छे रिटर्न दे सकते हैं

  • फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD)

  • पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

  • नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)

  • गोल्ड

  • इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS)

  • रिकरिंग डिपॉजिट (RD)

  • रियल एस्टेट

6 इन्वेस्टमेंट में 72 का नियम क्या है?

इन्वेस्टमेंट में 72 का नियम एक फॉर्मूला को दर्शाता है जिससे आपको यह पता लगता है कि आपका इन्वेस्टमेंट कितने समय में दोगुना हो जाएगा. सबसे पहले अपनी वार्षिक रिटर्न दर निर्धारित करें. 72 में अपनी रिटर्न दर का भाग दें, आपके इन्वेस्टमेंट को दोगुना होने में इतना ही समय लगेगा. उदाहरण के लिए, अगर आप 8% रिटर्न अर्जित करते हैं, तो आपका कॉर्पस नौ वर्षों में दोगुना हो जाएगा.

7 मैं अपना पैसा तेज़ी से कैसे बढ़ा सकता/सकती हूं?

बहुत से अधिक जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट तेज़ और उच्च रिटर्न देते हैं. हालांकि, उनमें आपका जोखिम भी बहुत अधिक होता है. तेज़ी से पैसा बनाने के आदर्श तरीके की पहचान करने के लिए उच्च जोखिम वाले और मध्यम जोखिम वाले इन्वेस्टमेंट विकल्पों के मिश्रण का मूल्यांकन करें.

8 सबसे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट कौन सा है?

सबसे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट विकल्प, इन्वेस्टर की जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है. कोई भी ऐसा इन्वेस्टमेंट सुरक्षित माना जाता है, जिसमें आपका पैसा धीरे-धीरे लगातार बढ़ता रहे. भविष्य के लिए कॉर्पस बनाते समय, आप अपनी जोखिम क्षमता का मूल्यांकन कर सकते हैं और न्यूनतम जोखिम वाले प्लान खोज सकते हैं.

9 क्या मुझे गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करना चाहिए?

गोल्ड एक बेहतरीन निवेश माध्यम है, जो आपके पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करता है और इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ हेजिंग प्रदान करता है. हालांकि, आपको कोई भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले अपनी फाइनेंशियल ज़रूरतों को समझना चाहिए.

10 क्या इन्वेस्टमेंट पर 10% रिटर्न संभव है?

हां, कुछ इन्वेस्टमेंट विकल्प 10% रिटर्न प्रदान करते हैं. फिर भी, याद रखें कि फंड का पिछला प्रदर्शन इस बात की गारंटी नहीं है कि यह भविष्य में भी अपने प्रदर्शन को दोहराएगा. इन्वेस्ट करने से पहले संभावित लाभ और जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें. या आप इसे बेहतर समझने के लिए एक्सपर्ट से परामर्श कर सकते हैं.

11 आप पांच वर्षों में अपना इन्वेस्टमेंट कैसे दोगुना कर सकते हैं?

उदाहरण के लिए, अगर आपका इन्वेस्टमेंट प्लान कम से कम 15% रिटर्न प्रदान कर रहा है, तो आप पांच वर्षों में अपने इन्वेस्टमेंट को दोगुना कर सकेंगे. इन्वेस्ट करने से पहले सभी विकल्पों पर विचार कर लें और एक ऐसे प्लान में इन्वेस्ट करें जो स्थिर रिटर्न प्रदान करते हुए आपके जोखिम को मैनेज करे. हालांकि, रिटर्न उस कमोडिटी के प्रदर्शन पर भी निर्भर करता है जिसमें पैसे इन्वेस्ट किए जाते हैं.

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* इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80C के तहत निर्दिष्ट शर्तों के अधीन. # इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के 10 (10D) के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन. यूनिट लिंक्ड बीमा प्रॉडक्ट कॉन्ट्रैक्ट के पहले पांच वर्षों के दौरान कोई लिक्विडिटी प्रदान नहीं करते हैं. पॉलिसीधारक, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्रोडक्ट में इन्वेस्ट की गई राशि को पांचवें वर्ष के अंत तक पूरी तरह से या आंशिक रूप से नहीं निकाल पाएंगे या पॉलिसी को सरेंडर नहीं कर पाएंगे. एच डी एफ सी लाइफ संचय प्लस (UIN: 101N134V20) एक नॉन-पार्टिसिपेटिंग, नॉन-लिंक्ड सेविंग इंश्योरेंस प्लान है. एच डी एफ सी लाइफ संचय फिक्स्ड मेच्योरिटी प्लान (UIN:101N142V04) एक नॉन-लिंक्ड, नॉन-पार्टिसिपेटिंग, इंडिविजुअल, सेविंग, जीवन बीमा प्लान है. इस प्रोडक्ट में जीवन बीमा कवरेज उपलब्ध है. एच डी एफ सी लाइफ स्मार्ट प्रोटेक्ट प्लान (UIN: 101L175V01) एक यूनिट लिंक्ड, नॉन-पार्टिसिपेटिंग इंडिविजुअल जीवन बीमा प्रोडक्ट है. एच डी एफ सी लाइफ संपूर्ण निवेश (UIN नंबर: 101L103V03) एक यूनिट लिंक्ड नॉन पार्टिसिपेटिंग जीवन बीमा प्लान है. इस प्रोडक्ट में जीवन बीमा कवरेज उपलब्ध है, एच डी एफ सी लाइफ क्लिक 2 वेल्थ (UIN:101L133V03) एक यूनिट लिंक्ड नॉन-पार्टिसिपेटिंग इंडिविजुअल जीवन बीमा प्लान है. यूनिट लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस प्रॉडक्ट, आम बीमा प्रॉडक्ट से अलग होते हैं और जोखिम कारकों के अधीन होते हैं. यूनिट लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में भुगतान किए गए प्रीमियम, कैपिटल मार्केट से जुड़े इन्वेस्टमेंट जोखिमों के अधीन हैं और यूनिट की NAV, फंड के प्रदर्शन और कैपिटल मार्केट को प्रभावित करने वाले कारकों के आधार पर ऊपर या नीचे जा सकती है और बीमित व्यक्ति अपने निर्णयों के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा. एच डी एफ सी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड केवल बीमा कंपनी का नाम है, कंपनी का नाम, कॉन्ट्रैक्ट का नाम किसी भी तरह से कॉन्ट्रैक्ट की क्वालिटी, उसकी भविष्य की संभावनाओं या रिटर्न को नहीं दर्शाता है. कृपया अपने बीमा एजेंट से या जिनसे भी आप बीमा ले रहे हैं, उनसे या बीमा प्रदाता के पॉलिसी डॉक्यूमेंट के माध्यम से, संबंधित जोखिम और लागू होने वाले शुल्कों के बारे में जान लें. इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत ऑफर किए जाने वाले अलग-अलग फंड केवल फंड के नाम हैं और ये किसी भी तरह इन प्लान की गुणवत्ता और भविष्य में उनके प्रॉस्पेक्ट और रिटर्न को नहीं दर्शाते हैं.

18. अगर आप एक सामान्य व्यक्ति हैं, 30% के इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं, आपकी टैक्स योग्य आय रु. 50 लाख से कम है, और आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो आप रु.1.5 लाख प्रति वर्ष के इंश्योरेंस प्रीमियम पर, टैक्स पर 46,800 की बचत कर सकते हैं. 

#टैक्स लाभ और छूट इनकम टैक्स एक्ट, 1961 और इसके प्रावधानों की शर्तों के अधीन हैं.

#टैक्स कानून समय-समय पर बदल सकते हैं.

#कस्टमर से अनुरोध है कि वह इनकम टैक्स कानून के तहत आने वाली अपनी पर्सनल टैक्स देयताओं के संबंध में अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से या पर्सनल टैक्स सलाहकार से टैक्स सलाह लें.

19. ULIP प्लान में, इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में इन्वेस्टमेंट जोखिम पॉलिसीधारक द्वारा वहन किए जाते हैं. @17.29% प्रति वर्ष. रिटर्न की %दर. दिखाया गया रिटर्न डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड की फंड परफॉर्मेंस के लिए है (पिछले 5 वर्षों के लिए). कृपया ध्यान दें कि फंड की पिछली परफॉर्मेंस, आने वाले भविष्य की परफॉर्मेंस का संकेत नहीं है. इस योजना में जीवन बीमा उपलब्ध है. शर्तें लागू.

ARN - ED/01/24/7462-HI